हे राम!
हम शर्मिंदा हैं,
देश में, रावण अब भी जिन्दा हैं ।
तेरी कथा सुनने की फुर्सत नही है,
रावण का गुणगान वितरण हो रहा है;
हे राम!
तेरे देश मेंदेवों का स्टिंग ओपरेशनऔरदैत्यों का चरित्र चित्रण हो रहा है।
हे राम !
सतियों का तप भंगकरा के सुर्प्नाखाओंका फैशन शो हो रहा है,
शबरी जूठे बेर को तरसे
जटायु कटे पंख को रो रहा है।
सत्ता कुम्भकर्ण की नींद सो रही है
जनता माँ कौशल्या की भाँती रो रही है।
धर्म के ठेकेदार कैकई सा हठ लिए बैठे हैं;
पुजारी मन्दिर के चढावे पर ऐंठे हैं।
है राम!
ये क्या हो रहा है?
राम के देश में सीता का देहव्यापार हो रहा है।
हे राम !
हम शर्मिंदा हैं।
माँ सीता का अपमान करने वालेकलाकारअब भी जिन्दा हैं।
तेरी धर्म ध्वजा को धुल धूसरित करने वालेसिपहसालार अभी जिंदा हैं।
हे राम!
अबकी तुम अवतार न लेना।
बस भेज दो अपनी वानर सेना।
अब कोई शान्ति का संदेश नही;
किसी दैत्य को हमने देना।
है राम!
अबकी रहम की भीख न दोकिसी विधर्मी आततायी को;
एक काम हो सके तो करना,
भेज दो लछमन भाई को।
हे शेषनाग के अवतार लछमन!
हम शर्मिंदा है।
राम के देश में ,
रावण के वंशज ;
ये हमारे राजनेताअब भी जिन्दा है.
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