मंगलवार, 25 नवंबर 2008

प्रण बहुत किए हमने....

प्रण बहुत किए हमने !

प्राण बहुत किए हमने
अंजाम देना बाकी है।
हाथ बहुत जोड़ चुके हैं
हाथों से काम लेना बाकी है।

और कब तक बहाओगे आंसू
ऐ वतन के नौजवान?
ज़िन्दगी भर सहे सितम तो क्या
जुल्मो-सितम की तमाम सेना बाकी है।

घुट घुट के जिए हो
तिल तिल के मरे जा रहे हो;
गर्व से कहते हो फिर भी,
आख़िरी मुकाम अभी बाकी है।

बहुत हो चुका रोना धोना
बाँध लो अब सर पे कफ़न।
बुजदिली का दामन छोडो
भीषण संग्राम अभी बाकी है.

1 टिप्पणी:

Arvind Gaurav ने कहा…

sahi kaha aapne wakt aa gaya.... ham yuvao ko ab jaag jana chahiye